कक्षा दसवी के विद्यार्थियों के वैज्ञानिक अभिक्षमता पर एक अध्ययन
अर्चना त्रिपाठी1, डाॅ के.एस. गुरूपंच2
1सहायक प्राध्यापक, एम.जे. काँलेज भिलाई
2प्राचार्य, एम.जे. काँलेज भिलाई
’ब्वततमेचवदकपदह ।नजीवत म्.उंपसरू
सारांश
आज का युग औद्योगिक विकास का युग है, मानवीय आवष्यकताओं में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। उद्योगों ने पारिवारिक, वैवाहिक तथा सामुदायिक जीवन को निष्चित रूप से प्रभावित किया है। आज के समय में (काॅलेजो में) विद्यार्थियों की संख्या सीमित होने के कारण उद्योंगो के लिए कर्मचारी चयन एक समस्या बन गई है। इन समस्याओं को देखते हुए वर्तमान समय में यह आवष्यकता हो गया है, कि उसे ऐसे कर्मचारी के लिए नियुक्त किया जाय जो उचित क्षमता रखते हो। इस समस्या के समाधान के लिए परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। ऐसी परिस्थिति में निष्चिय रूप से शिक्षा का उद्देष्य प्रतियोगिता के लिए अच्छे विद्यार्थी तैयार करना है। वैज्ञानिक अभिक्षमता विज्ञान क्षेत्र या समूह में व्यक्ति के कार्य कुषलता की विषिश्ट योग्यता अथवा विषिश्ट क्षमता है। बालक के विकास एवं व्यक्ति की वैज्ञानिक सफलता में षिक्षक, माता-पिता, अभिभावक आदि लोग यदि वैज्ञानिक अभिक्षमता के महत्व को समझ सकें तो बालक के समुचित विकास हेतु उपयुक्त पर्यावरण तैयार किया जा सकता है।
की वर्ड -वैज्ञानिक अभिक्षमता, मापनी, औद्योगिक विकास, विषिश्ट योग्यता, आवासिय स्कूल।
प्रस्तावना:
मनुष्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है विद्यार्थी जीवन यह समय ही उसके विकास की सहीं राह तय कर सकता है यदि हम विद्यार्थी के वैज्ञानिक अभिक्षमता का मापन कर सकें तो उसके संपूर्ण चरित्र के निमार्ण में एक सफल शिक्षक साबित हो सकते हैं। इस विचार को लेकर यह षोध कार्य किया जा रहा है, कि ”कक्षा दसवी के विद्यार्थियों के वैज्ञानिक अभिक्षमता पर एक अध्ययन“ आशा है, यह षोध भविष्य में विद्यार्थियों के जीवन को विकास की सहीं राह तक ले जाने में मार्ग दर्शक की भूमिका अदा करेगा।
अनुशंधान क्रियाविधि
प्रस्तुत शोध में अनुसंधान क्रियाविधि के रूप में उद्देश्यों और अनुसंधान के प्रकार, अनुसंधान के महत्व
अनुसंधान की प्रक्रिया, अनुसंधान समस्या, सुविधाएँ, महत्व, विशेषताओं, अवधारणाओं और अनुसंधान डिजाइन के प्रकार, परिकल्पना और इसके परीक्षण, नमूना सर्वेक्षण और नमूने के तरीके आदि को लिया गया है।
उद्देष्य
ऽ कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों अभिक्षमता का मापन करना।
ऽ शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत् कक्षा 10 वीं के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिक्षमता का मापन करना।
ऽ निजी विद्यालयों में अध्ययनरत् कक्षा 10 वीं के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिक्षमता का मापन करना।
ऽ शासकीय एवं निजी विद्यालयों में अध्ययनरत् कक्षा 10वीं के छात्रों की वैज्ञानिक अभिक्षमता का मापन करना।
परिकल्पना
भ्0 शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत् कक्षा 10 वीं के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिक्षमता में सार्थक अंतर नहीं पाया जाएगा।
भ्1 शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत् कक्षा 10 वीं के छात्रों की वैज्ञानिक अभिक्षमता में सार्थक अंतर पाया जाएगा।
भ्2 शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत् कक्षा 10 वीं के छात्राओं की वैज्ञानिक अभिक्षमता में सार्थक अंतर पाया जाएगा।
अध्ययन की परिसीमा
ऽ यह अध्ययन मुंगेली शहर के विद्यार्थियों तक ही सीमित है।
ऽ इस अध्ययन हेतु मुंगेली शहर के शासकीय एवं अषासकीय स्कूलों का चयन किया गया है।
ऽ इस अध्ययन हेतु केवल 10 वीं कक्षा के विद्यार्थियों का चयन किया गया है।
ऽ इस अध्ययन हेतु 10वीं कक्षा के छात्र व छात्राओं दोनों का ही चयन किया गया है।
न्यादर्श
शोध प्रविधि
शोध प्रविधि के अन्तर्गत शोधकर्ता किसी तथ्य को बार-बार देखता है जिससे उसके सम्बन्ध में प्रदत्तों को एकत्रित करता है तथा उसके आधार पर उसके सम्बन्ध में निश्कर्श निकालता है। शोध कार्यों द्वारा चरों का सहसंबंध ज्ञात किया जाता है। जबकि ऐतिहासिक शोधकार्य में नवीन तथ्यों की खोज की जाती है।
परिणाम तथा विवेचना
इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि शासकीय एवं अषासकीय विद्यालय के छात्रों की वैज्ञानिक अभिक्षमता के मध्य सार्थक अंतर पाया गया। अतः यह परिकल्पना स्वीकृत होती है।
इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि शासकीय एवं अषासकीय विद्यालय के छात्राओं की वैज्ञानिक अभिक्षमता के मध्य सार्थक अंतर पाया गया। अतः यह परिकल्पना स्वीकृत होती है।
सुझाव
विद्यार्थियों के लिये
ऽ विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अभिक्षमता बढ़ाने हेतु स्कूलों में हो रहे विज्ञान संबंधी कार्यक्रमों प्रयोगशालाओं आदि में बढ़-बढ़ कर भाग लेना चाहिए।
ऽ विद्यार्थियों को अपने दैनिक जीवन में घट रहे घटनाओं से विज्ञान को जोड़ कर देखना चाहिए जिनसे उनकी वैज्ञानिक अभिक्षमता बढ़ सकती है।
ऽ विद्यार्थियों को चाहिए कि वे पहले से सिद्ध सिद्धांतों के बारे में चिंतन करे जिससे उनकी वैज्ञानिक अभिक्षमता बढ़ सकती है।
शिक्षको के लिए
ऽ विद्यार्थियों के वैज्ञानिक अभिक्षमता को समझ कर उनके अभिक्षमता को बढ़ावा देना चाहिए ।
ऽ शिक्षकों को चाहिए कि वह विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिक्षमता बढ़ाने के लिए विज्ञान संबंधी विभिन्न गतिविधियाँ कराये।
ऽ शिक्षकों को विद्यार्थियों के मदद् से वैज्ञानिक गतिविधियाँ कराना चाहिए जिससे उनकी वैज्ञानिक अभिक्षमता का विकास हो ।
अभिभावक के लिए
ऽ अभिभावकों को चाहिए कि विज्ञान विषय की अध्ययन के लिए छात्रों को अनुकूल वातावरण का निर्माण करे।
ऽ अभिभावकों को चाहिए कि छात्रों को वैज्ञानिक गतिविधि करने के लिए उपयुक्त सामग्री की व्यवस्था करनी चाहिए तथा छात्रों को प्रेरित करना चाहिए।
ऽ अभिभावकों के पास विद्यार्थियों के प्रगति पत्र अवष्य भेजे जाने चाहिए जिससे वे बच्चों के बारे में जान सके।
अनुकरणीय अध्ययन
ऽ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के वैज्ञानिक अभिक्षमता का तुलनात्मक अध्ययन।
ऽ सामान्य एवं अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के वैज्ञानिक अभिक्षमता का तुलनात्मक अध्ययन।
ऽ शहरी क्षेत्रों के शालाओं तथा ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय शालाओं में अध्ययनरत् विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिक्षमता का अध्ययन।
ऽ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी शालाओं के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिक्षमता विज्ञान पर एक अध्ययन।
ऽ अंगे्रजी माध्यम का उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तथा हिन्दी माध्यम के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत् कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिक्षमता विज्ञान पर एक अध्ययन।
संदर्भ ग्रंथ
1 अययर के.के. (1977) माध्यमिक शाला के छात्रों में गणित में कम उपलब्धि से संबंधित कारकों पर अध्ययन 4जी सर्वे आॅफ रिसर्च इन एजुकेशन, पृश्ठ नं. 663
2 अस्थाना विपिन (1999) मनोविज्ञान और श्क्षिा में मापन व मूल्यांकन, विनोद पुस्तक मंदिर, आगरा पृष्ठ नं. 254
3 कुलश्रेश्ठ एस.पी. (2008) शिक्षा मनोविज्ञान, आर. लाल बुक डिपो, मेरठ पृश्ठ नं. 389
4 कुलश्रेश्ठ ए. के. (2005) गणित शिक्षण, राधा प्रकाशन, आगरा पृश्ठ नं. 273
5 कपिल डाॅ. एच के (2006) अनुसंधान विधियाँ, एस.पी. भार्गव, बुक हाउस पृश्ठ नं. 115
6 पाठक पी. डी. व त्यागी (2005) शिक्षा के दार्शनिक सिध्दांत, विनोद पुस्तक मंदिर, आगरा पृष्ठ नं. 85
7 पाण्डेय एन.एन. व वाजपेयी वी. के. (2003): गणितीय चिंतन के विकास पर एक अध्ययन, इण्डियन जनरल आॅफ साइकोमेट्री इन एजुकेशन, पृश्ठ नं. 165-168 वाल्यूम 345 नं. 2
8 मंगल एस. के. (2005) गणितीय शिक्षण, आर्य बुक डिपो, पृश्ठ नं. 198
9 लाल रमन विहारी (2008) शैक्षिक मापन मूल्यांकन एवं सांख्यिकी पृश्ठ नं. 47
10 शर्मा आर. ए (2004) शिक्षा अनुसंधान, आर. लाल बुक डिपो, मेरठ पृष्ठ नं. 444
11 स्वरूप सक्सेना एन. आर.(2002) शिक्षा दर्शन, आर. लाल बुक डिपो, मेरठ पष्ठ नं. 384
Received on 02.12.2016 Modified on 12.12.2016
Accepted on 28.12.2016 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Ad. Social Sciences. 2016; 4(4):212-215.